Shri Rudranath Temple Pach kedar RudraPrayag Uttarakhand
इस मंदिर में बड़े विधि -विधान से होती है भगवान भोलेनाथ की मुख की पूजा -अर्चना।
Shri Rudranath Temple Pach kedar Chamoli Uttarakhand : उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है रुद्रनाथ मंदिर जहाँ भगवान भोलेनाथ नीलकंठ रूप में विराजमान है । बाबा रुद्रनाथजी को पंच केदारों (केदारनाथ , तुंगनाथ , रुद्रनाथ , मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर) में से चौथा केदार माना जाता है। ये मंदिर पंच केदारों में चौथा केदार मंदिर होने के साथ – साथ सबसे कठिन ट्रैकिंग मार्ग व मार्ग में पड़ने वाले खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी जाना जाता है। समुंद्रतल से लगभग 2,286 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ के मुख की पूजा -अर्चना बड़े विधि – विधान से की जाती है। इस मंदिर को नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के समान ही माना जाता है। उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण सर्दियों में यह पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है। इसीलिए नवंबर माह में दीपावली के बाद रुद्रनाथ मंदिर के कपाट विधिवत पूजा -अर्चना के बाद लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं और बाबा रुद्रनाथजी को डोली में बैठाकर एक विशाल धार्मिक उत्सव के साथ बड़े धूमधाम से गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में लाया जाता है जहाँ वो अगले छः माह तक विराजमान रहते हैं। चारों तरफ हरियाली से घिरे रुद्रनाथ मंदिर परिसर का वातावरण मन को असीम शांत प्रदान करता है। यहाँ से आस -पास के क्षेत्र का अद्भुत विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
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कौन हैं पंचकेदार ?
महाभारत युद्ध के बाद गोत्र हत्या (गोत्र यानि अपने ही वंश के लोग) के पाप से मुक्त होने के लिए पांडवों ने भगवान भोलेनाथ की कठोर तपस्या की लेकिन भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन नही दिये क्योंकि वो उनसे काफी नाराज थे। इसीलिए वो बैल का रूप धारण कर हिमालय चले गये। लेकिन हिमालय में विचरण करते वक्त भीम ने उन्हें पहचान लिया। भीम ने उन्हें पकड़ना चाहा लेकिन बैल रूपी शिव तुरंत जमीन में समा गये। बाद में भगवान भोलेनाथ के शरीर के अंग पांच जगहों में प्रकट हुए जिन्हें आज “पंच केदार” कहा जाता है। केदारनाथ धाम जिसे प्रथम केदार माना जाता है। वहाँ बैल का पृष्ठ भाग प्रकट हुआ। इसीलिए वहाँ उनके पृष्ठ भाग (कूबड़) की पूजा की जाती है। तुंगनाथ में बाबाजी की भुजाओं की पूजा की जाती है , रुद्रनाथ में बाबा के मुख की पूजा की जाती है , मध्यमहेश्वर में बाबा की नाभि प्रकट हुई थी और कल्पेश्वर में बाबा की जटाओं की पूजा होती है। यानि गढ़वाल हिमालय में बाबा भोलेनाथ के पांच अंगों की पूजा पांच अलग -अलग रूपों में होती है जिन्हें पंच केदार कहते हैं। ये सभी मंदिर बेहद पवित्र व प्राचीन हैं।
कब बंद होते हैं रुद्रनाथ मंदिर के कपाट ।
सर्दियों के शुरू होते ही रुद्रनाथ मंदिर में अत्यधिक ठण्ड व बर्फवारी होती है जिस वजह से नवंबर माह में दीपावली के बाद विशेष पूजा -अर्चना करके मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं और फिर गर्मियों में अक्षय तृतीया (अप्रैल -मई) के दिन रुद्रनाथ मंदिर के कपाट को पुन: बड़े धूमधाम के साथ खोला जाता है ।
गोपेश्वर का गोपीनाथ मंदिर है बाबा रुद्रनाथ जी का शीतकालीन निवास ।
प्रत्येक वर्ष दीपावली के बाद , सर्दियों के शुरू होते ही गोपेश्वर में बाबा रुद्रनाथजी के आगमन का इंतजार स्थानीय लोगों के साथ – साथ श्रद्धालुओं को भी रहता है। सर्दियों में (नवंबर माह में) दीपावली के बाद रुद्रनाथ मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद हो जाते हैं और बाबा रुद्रनाथ (रुद्रनाथ बाबा की उत्सव मूर्ति) को डोली में बैठाकर बड़े धूमधाम से गोपेश्वर (गोपीनाथ मंदिर) लाया जाता है जहाँ वो अगले छः माह तक विराजमान रहते हैं। गोपीनाथ मंदिर को बाबा रुद्रनाथजी की “शीतकालीन गद्दी (Winter Seat)” भी कहा जाता है। यहाँ रक्षाबंधन के दिन बहुत भव्य मेले का आयोजन होता है।
अद्भुत व अति प्राचीन है रूद्रनाथ मंदिर ।
बाबा रुद्रनाथजी को पंच केदारों में से चौथा केदार माना जाता है । इसीलिए ये मंदिर सभी पंच केदारों में चौथा मंदिर है। इसके साथ – साथ यह मंदिर समुंद्रतल से लगभग 2,286 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। ये मंदिर सभी केदार मंदिरों में सबसे कठिन ट्रैकिंग मार्ग के लिए जाना जाता है। यहाँ पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को मंडल गाँव से लगभग 20 किलोमीटर का सीधा खड़ा रास्ता तय करना पड़ता है । हालाँकि मंदिर में ठहरने के लिए मंदिर समिति के द्वारा धर्मशाला या टेंट की व्यवस्था की जाती है। मगर बेस कैंप (सगर गांव / मंडल गाँव) में श्रद्धालुओं के रहने के लिए अच्छे होमस्टे या होटल उपलब्ध हैं। पांडवों द्वारा निर्मित यह मंदिर अद्भुत , प्राचीन व भव्य है जो मुख्यतः पत्थर व लकड़ी से बना है। मुख्य मंदिर में प्राकृतिक रूप से बनी एक गुफा है जहाँ भोलेनाथ चेहरे के रूप में विराजमान हैं। मुख्य पुजारी के रूप में गोपेश्वर के भट्ट व तिवारी लोग मंदिर में पूजा -अर्चना का काम -काज देखते हैं। मंदिर के पास ही पांचों पाडवों , माता कुंती व द्रौपती के मंदिर भी हैं। मंदिर के निकट ही “वैतरणी नदी” या “मोक्ष की नदी” या “रुद्रगंगा” बहती है जहां पिंडदान कर बेहद शुभ माना जाता है। मंदिर के आस – पास ताराकुंड , सूर्यकुंड ,चंद्रकुंड और मानाकुंड मौजूद हैं।
क्या करें ?
मंदिर तक पहुँचने के लिए दो बेस कैंप हैं। पहला सागर गाँव जो गोपेश्वर से लगभग 3 किलोमीटर दूर है और दूसरा मंडल गाँव जो गोपेश्वर से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। मंडल गाँव से रुद्रनाथ मंदिर जाते हुए आप रास्ते में पड़ने वाले माता अनुसूया मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। बाबा रुद्रनाथजी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लीजिए। यहाँ से नंदा देवी , हाथी पर्वत , देवस्थान , नंदा घुंटी व त्रिशूल पर्वत की शानदार चोटियाँ दिखाई देती हैं जिनका आप आनंद ले सकते हैं। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य , पर्वतारोहण , ट्रैकिंग और कैंपिंग का मजा लीजिए। पुंग बुग्याल , ल्यूटी बुग्याल और पनार बुग्यालों की खूबसूरती का आनंद उठाइये। खूब फोटोग्राफी कीजिए । इसके अलावा भी चमोली शहर के आस -पास कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे आदि जहाँ आप जा सकते हैं। आने से पहले अपना Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
रुद्रनाथ मंदिर आने का सही समय (Best Time To Visit In Rudranath Temple)
सर्दियों के शुरू होते ही रुद्रनाथ मंदिर में ठण्ड व बर्फवारी होती है जिस वजह से नवंबर माह में दीपावली के बाद विशेष पूजा -अर्चना कर मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं। इसीलिए अगर आप बाबा रुद्रनाथजी के दर्शन रुद्रनाथ मंदिर में ही करना चाहते हैं तो गर्मियों (अप्रेल से नवंबर के बीच) में आइये। मगर जाड़ों में आप बाबा रुद्रनाथजी के दर्शन गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में कर सकते हैं। अगर आप चमोली में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
ध्यान रखने योग्य बातें।
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सर्दियों में बंद हो जाते हैं। इसीलिए मंदिर आने से पहले मंदिर के कपाट खुलने व बंद होने की पूरी जानकारी अवश्य ले लीजिए। अगर आप यहाँ ट्रैकिंग करना चाहते हैं तो पूरी तैयारी के साथ आइये। अगर आप यहां पर्वतारोहण , ट्रैकिंग या कैंपिंग करना चाहते हैं तो भी इसके बारे में पहले जानकारी अवश्य लें । किसी स्थानीय अनुभवी गाइड से अवश्य सलाह लें। मंदिर में पैदल चलने हेतु अच्छी क्वालिटी का जूता अवश्य पहनें। अगर आप चमोली / गोपेश्वर में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।


