Gaurikund RudraPrayag Uttarakhand
जहाँ माँ गौरी ने भगवान भोलेनाथ को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
Gaurikund RudraPrayag Uttarakhand : उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के रूद्रप्रयाग शहर से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित है गौरीकुंड । समुंद्रतल से लगभग 1981 मीटर की ऊँचाई पर स्थित और गढ़वाल हिमालय की गोद में बसा गौरीकुंड एक प्रमुख हिन्दू धार्मिक तीर्थ स्थल होने के साथ -साथ केदारनाथ धाम यात्रा का बेस कैंप भी है। केदारनाथ धाम जाने वाले सभी यात्रियों के लिए यह एक अहम पड़ाव है। सभी श्रद्धालु गौरीकुंड तक वाहन से पहुँचते हैं और फिर वहाँ से लगभग 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर केदारनाथ मंदिर तक पहुँचते हैं। हालाँकि कुछ लोग इस दूरी को खच्चर , पालकी या हेलीकाप्टर से भी पूरी करते हैं। माना जाता है कि माता गौरी (पार्वती) ने भगवान भोलेनाथ को पति रूप में प्राप्त करने के लिए इसी जगह पर कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। यहाँ प्राकृतिक रूप से गर्म पानी के दो झरने हैं जिन्हें “तप्त कुण्ड” कहा जाता है। मान्यता है कि केदारनाथ धाम जाने से पहले इन तप्त कुंडों में स्नान करने से आत्मा व शरीर दोनों ही शुद्ध हो जाते हैं। इन तप्तकुण्डों के पानी में प्राकृतिक रूप से सल्फर व अन्य खनिज घुले रहते हैं जिससे इनका पानी हमेशा गर्म व औषधीय गुणों से भरपूर रहता है।
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गौरीकुंड में है प्राचीन गौरी माई मंदिर ।
माना जाता है कि यहाँ माँ गौरी (पार्वती) ने पार्वतीशीला में बैठकर भगवान भोलेनाथ को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी जिसके पश्चात भगवान भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उन्हें विवाह का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद भोलेनाथ व माँ गौरी का विवाह पास ही स्थित त्रियुगी नारायण मंदिर में सम्पन्न हुआ। इसीलिए यहाँ माँ गौरी का एक प्राचीन मंदिर भी है जिसे “गौरी माई मंदिर” के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान भोलेनाथ व माँ गौरी विराजमान हैं।
क्या करें ?
भोलेनाथ बाबा व माँ गौरी के दर्शन कीजिए। उनका आशीर्वाद लीजिए। गौरी माई मंदिर परिसर में शांति से बैठिये। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस कीजिए। आस -पास के प्राकृतिक सौंदर्य का मजा लीजिए। पर्वतारोहण , ट्रैकिंग , कैंपिंग का मजा लीजिए। खूब फोटोग्राफी कीजिए । इसके अलावा भी रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , तुंगनाथ मंदिर , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता आदि जहाँ आप जा सकते हैं। आने से पहले अपना Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
गौरीकुंड आने का सही समय (Best Time To Visit Gaurikund)
पवित्र केदारनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल -मई) के दिन बड़े धूमधाम के साथ खुलते हैं और नवंबर माह में दीपावली के बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन छः महीने के लिए बंद हो जाते हैं। इसीलिए आपको बाबा केदारनाथजी के दर्शन करने के लिए मई से नवंबर के बीच ही आना पड़ेगा। इसी समय आप गौरीकुंड भी आ सकते हैं। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
ध्यान रखने योग्य बातें।
केदारनाथ धाम पहुँचने के लिए गौरीकुंड से लगभग 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। हालाँकि यह यात्रा आप खच्चर , पालकी या हेलीकाप्टर से भी पूरी कर सकते हैं। लेकिन अगर आप पैदल जाना चाहते हैं तो पूरी तैयारी के साथ आइये। अगर आप यहां पर्वतारोहण , ट्रैकिंग , कैंपिंग करना चाहते हैं तो इसके बारे में पहले जानकारी अवश्य लें । किसी स्थानीय अनुभवी गाइड से अवश्य सलाह लें। रूद्रप्रयाग में पैदल चलने हेतु अच्छी क्वालिटी का जूता अवश्य पहनें। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
कैसे पहुँचें गौरीकुंड रूद्रप्रयाग ( How To Reach Gaurikund)
कितने दिन के लिए आए (Suggested Duration)
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ बाबा के दर्शन कीजिए । इसके अलावा रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास भी कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे आदि माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , तुंगनाथ मंदिर , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता , खिरसू , सोनप्रयाग , गुप्तकाशी , गौरीकुंड , जहाँ आप जा सकते हैं। इसीलिए यहाँ आप अपने हिसाब से अपना समय बिता सकते हैं। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book कर लीजिए।
