Shri Kedarnath Jyotirlinga Temple RudraPrayag Uttarakhand
इस ज्योतिर्लिंग की पूजा अर्चना से गोत्र हत्या के पाप से मुक्त हुए थे पांडव।
Shri Kedarnath Jyotirlinga Temple RudraPrayag Uttarakhand : उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के रूद्रप्रयाग शहर से लगभग 86 किलोमीटर दूर मंदाकिनी नदी के तट पर विराजमान हैं बाबा केदारनाथजी । समुंद्रतल से लगभग 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित और गढ़वाल हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। लगभग 80 फिट ऊँचे इस विशाल व भव्य मंदिर के गर्भगृह में विराजमान प्राचीन ज्योतिर्लिंग को स्वयंभू (खुद से प्रकट हुआ) माना जाता है। यही नही यह पवित्र मंदिर चार धामों व पंचकेदारों में भी सम्मलित है। कत्यूरी शैली में बना यह मंदिर पूरी तरह पत्थरों से निर्मित है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित पवित्र ज्योतिर्लिंग का आकार त्रिकोणीय (पिरामिड जैसा आकार) है। गर्भगृह के बाहर माँ पार्वती , पंच पांडव , श्रीकृष्ण व माँ कुंती की प्राचीन मूर्तियों स्थापित हैं। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों के पौत्र महाराजा जन्मेजय ने कराया था। बाद में आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका जीर्णोद्धार कराया। इस क्षेत्र का ऐतिहासिक नाम भी “केदार खंड” है। मंदिर द्वार पर गणेशजी के साथ -साथ नंदी महाराज भी बड़े शान से विराजमान हैं। मंदिर परिसर का वातावरण एकदम शांत , सुरम्य व आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है।
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कौन हैं पंचकेदार ?
पवित्र व पवन केदारनाथ धाम को पंच केदार धामों में प्रथम केदार धाम माना जाता है। महाभारत युद्ध के बाद गोत्र हत्या (गोत्र यानि अपने ही वंश के लोग) के पाप से मुक्त होने के लिए पांडवों ने भगवान भोलेनाथ की कठोर तपस्या की लेकिन भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन नही दिये क्योंकि वो उनसे काफी नाराज थे। इसीलिए वो बैल का रूप धारण कर हिमालय चले गये। लेकिन हिमालय में विचरण करते वक्त भीम ने उन्हें पहचान लिया। भीम ने उन्हें पकड़ना चाहा लेकिन बैल रूपी शिव तुरंत जमीन में समा गये। बाद में भगवान भोलेनाथ के शरीर के अंग पांच जगहों में प्रकट हुए जिन्हें आज “पंच केदार” कहा जाता है। केदारनाथ धाम जिसे प्रथम केदार माना जाता है। वहाँ बैल का पृष्ठ भाग प्रकट हुआ। इसीलिए वहाँ उनके पृष्ठ भाग (कूबड़) की पूजा की जाती है। तुंगनाथ में बाबाजी की भुजाओं की पूजा की जाती है , रुद्रनाथ में बाबा के मुख की पूजा की जाती है , मध्यमहेश्वर में बाबा की नाभि प्रकट हुई थी और कल्पेश्वर में बाबा की जटाओं की पूजा होती है। यानि गढ़वाल हिमालय में बाबा भोलेनाथ के पांच अंगों की पूजा पांच अलग -अलग रूपों में होती है जिन्हें पंच केदार कहते हैं। ये सभी मंदिर बेहद पवित्र व प्राचीन हैं।
कब खुलते हैं केदारनाथ धाम के कपाट ।
पवित्र केदारनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल -मई) के दिन बड़े धूमधाम के साथ खुलते हैं। कपाट खुलने के बाद गर्मियों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में बाबा केदारनाथजी के दर्शन करने पहुँचते हैं । लेकिन सर्दियों के शुरू होते ही यहाँ अत्यधिक ठण्ड व बर्फवारी होती है जिस वजह से नवंबर माह में दीपावली के बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन उसी धूमधाम के साथ मंदिर के कपाट पुन: लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं।
उखीमठ है बाबा केदार का शीतकालीन निवास ।
सर्दियों में (नवंबर माह में) दीपावली के बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन केदारनाथ मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं। और बाबा केदारनाथजी (केदारनाथबाबा की उत्सव मूर्ति) को डोली में बैठाकर बड़े धूमधाम से उखीमठ (ओमकारेश्वर मंदिर) लाया जाता है जहाँ वो अगले छः माह तक विराजमान रहकर भक्तों को दर्शन देते हैं। उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।
2013 में केदारनाथ में आई थी भयंकर प्राकृतिक आपदा ।
मंदाकिनी नदी के किनारे बसे इस पवित्र धाम में वर्ष 2013 में भयंकर प्राकृतिक आपदा आई थी जिसमें कई लोगों ने अपनी जान गँवाई थी लेकिन इस मंदिर को लेशमात्र भी नुकसान नही हुआ। बड़े ही चमत्कारिक ढंग से एक विशाल चट्टान मंदिर के पिछले हिस्से में आकर रुक गई जिससे बाढ़ का पानी व मलवा मंदिर की तरफ नही जा पाया और मंदिर पूर्ण रूप से सुरक्षित रहा। आज उसी विशाल शिला को “भीम शिला” के नाम से जाना जाता है। यहाँ पहुंचने वाले भक्त बड़े ही श्रद्धापूर्वक इस शिला की पूजा अर्चना करते हैं।
पाण्डवों से जुडी है केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रकट होने की कथा ।
माना जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद अपने ही परिजनों की हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडव भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने यहाँ पहुँचे लेकिन भोलेबाबा उन्हें दर्शन नही देना चाहते थे। इसीलिए वो यहाँ से महिष रूप (नंदी रूप) में अंतर्ध्यान होने लगे तभी पांडवों ने उनके पृष्ठ भाग (नंदी का कूबड़) को पकड़ लिया । पांडवों ने उनसे विनम्र प्रार्थना की जिस पर भोलेनाथ उनसे प्रसन्न होकर महिष के पृष्ठ भाग के रूप में वही विराजमान हो गये। इसके बाद पांडवों ने उसी स्थान पर केदारनाथ बाबा की पूजा अर्चना की और गोत्र हत्या के पाप से मुक्त हुए। तभी से केदारनाथ बाबा यहाँ विराजमान हैं। महिष रूपी उन्हीं भोलेबाबा का श्रीमुख नेपाल में पशुपतिनाथ के रूप में प्रकट हुआ।
क्या करें ?
बाबा केदारनाथ जी के दर्शन कीजिए। उनका आशीर्वाद लीजिए और अपने जीवन को उज्ज्वल कीजिए। मंदिर परिसर में शांति से बैठकर कल -कल बहती मंदाकिनी नदी को देखिये। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस कीजिए। आस -पास के प्राकृतिक सौंदर्य का मजा लीजिए। पर्वतारोहण , ट्रैकिंग , कैंपिंग का मजा लीजिए। खूब फोटोग्राफी कीजिए । इसके अलावा भी रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , तुंगनाथ मंदिर , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता आदि जहाँ आप जा सकते हैं। आने से पहले अपना Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
केदारनाथ मंदिर आने का सही समय (Best Time To Visit In Shri Kedarnath Jyotirlinga Temple)
पवित्र केदारनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल -मई) के दिन बड़े धूमधाम के साथ खुलते हैं और नवंबर माह में दीपावली के बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन छः महीने के लिए बंद हो जाते हैं। इसीलिए आपको बाबा केदारनाथजी के दर्शन करने के लिए मई से नवंबर के बीच ही आना पड़ेगा। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
ध्यान रखने योग्य बातें।
केदारनाथ धाम पहुँचने के लिए गौरीकुंड से लगभग 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। हालाँकि यह यात्रा आप खच्चर , पालकी या हेलीकाप्टर से भी पूरी कर सकते हैं। लेकिन अगर आप पैदल जाना चाहते हैं तो पूरी तैयारी के साथ आइये। अगर आप यहां पर्वतारोहण , ट्रैकिंग , कैंपिंग करना चाहते हैं तो इसके बारे में पहले जानकारी अवश्य लें । किसी स्थानीय अनुभवी गाइड से अवश्य सलाह लें। रूद्रप्रयाग में पैदल चलने हेतु अच्छी क्वालिटी का जूता अवश्य पहनें। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
कैसे पहुँचें केदारनाथ मंदिर रूद्रप्रयाग ( How To Reach Shri Kedarnath Jyotirlinga Temple)
कितने दिन के लिए आए (Suggested Duration)
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ बाबा के दर्शन कीजिए । इसके अलावा रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास भी कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे आदि माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , तुंगनाथ मंदिर , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता , खिरसू , सोनप्रयाग , गुप्तकाशी , गौरीकुंड , जहाँ आप जा सकते हैं। इसीलिए यहाँ आप अपने हिसाब से अपना समय बिता सकते हैं। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book कर लीजिए।
