Omkareshwar Temple RudraPrayag Uttarakhand
छः महीने का शीतकालीन प्रवास इसी मंदिर में होता है बाबा केदारनाथजी का।
Omkareshwar Temple Ukhimath RudraPrayag Uttarakhand : उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के रूद्रप्रयाग शहर से लगभग 41 किलोमीटर दूर स्थित है उखीमठ। इसी उखीमठ में स्थित है भगवान ओंकारेश्वर का अति प्राचीन , अद्भुत व भव्य मंदिर जहाँ भगवान ओंकारेश्वर (शिव) चिरकाल से विराजमान हैं। समुंद्रतल से लगभग 1311 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यही ओंकारेश्वर मंदिर बाबा केदारनाथजी (पंचमुखी विग्रह) व द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी (भोगमूर्ति) का शीतकालीन प्रवास स्थान भी है। केदारनाथ धाम गढ़वाल हिमालय की गोद में बसा होने के कारण सर्दियों में पूरी तरह से बर्फ से ढक जाता है। इसीलिए नवंबर माह में दीपावली के बाद भाई दूज के दिन केदारनाथ धाम के कपाट विधिवत पूजा -अर्चना के बाद लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं और बाबा केदारनाथजी (पंचमुखी विग्रह) को डोली में बैठाकर एक विशाल धार्मिक उत्सव के साथ बड़े धूमधाम से उखीमठ के इसी ओमकारेश्वर मंदिर में लाया जाता है जहाँ वो अगले छः माह तक द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी (भोगमूर्ति) के साथ यहाँ विराजमान रहते हैं। ओंकारेश्वर मंदिर परिसर का वातावरण एकदम शांत , सुरम्य है। श्रद्धालु व मंदिर में गूँजती लगातार घंटों की ध्वनि इसे और अधिक पवित्र व आध्यात्मिक बना देती है।
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कब बंद होते हैं केदारनाथ धाम के कपाट ।
सर्दियों के शुरू होते ही केदारनाथ धाम में अत्यधिक ठण्ड व बर्फवारी होती है जिस वजह से नवंबर माह में दीपावली के बाद भाई दूज के दिन विशेष पूजा -अर्चना के बाद मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं और फिर गर्मियों में अक्षय तृतीया (अप्रैल -मई) के दिन केदारनाथ धाम के कपाट पुन: बड़े धूमधाम के साथ खोले जाते हैं ।
उखीमठ का यही ओमकारेश्वर मंदिर है बाबा केदारनाथजी का शीतकालीन निवास ।
सच में उखीमठ बेहद पवित्र व पावन स्थान है जो धार्मिक व आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह स्थान अपनी सदियों पुरानी एक विशिष्ट धार्मिक संस्कृति को समेटे है। वर्षों से यह पवित्र भूमि बाबा केदारनाथजी के भव्य आगमन उत्सव की साक्षी भी रही है। यहाँ हर साल सर्दियों के शुरू होते ही बाबाकेदारनाथ जी के आगमन का इंतजार सभी को रहता है। सर्दियों में (नवंबर माह में) दीपावली के बाद केदारनाथ मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद हो जाते हैं और बाबा केदारनाथजी (केदारनाथबाबा की उत्सव मूर्ति यानि पंचमुखी विग्रह) को डोली में बैठाकर बड़े धूमधाम से उखीमठ (ओमकारेश्वर मंदिर) लाया जाता है जहाँ वो अगले छः माह तक विराजमान रहते हैं। ओमकारेश्वर मंदिर में सालभर भगवान ओंकारेश्वर (शिव) की नित्य पूजा – अर्चना की जाती है।अत्यधिक ठण्ड पड़ने की वजह से मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट भी छः माह के लिए बंद कर दिये जाते हैं और द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी (भोगमूर्ति) को भी बड़े धार्मिक रीति -रिवाजों के साथ बड़े सम्मान के साथ शीतकाल में यही लाया जाता है जहाँ वो अगले छः माह तक बाबा केदारनाथजी के साथ यही विराजमान रहते हैं। उखीमठ को बाबा केदारनाथजी और द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी की “शीतकालीन गद्दी (Winter Seat)” भी कहा जाता है।
इस पावन धरा पर विराजमान रहते हैं पंचकेदार ।
उखीमठ इतनी पावन धरा है कि यहाँ पंचकेदार बाबा केदारनाथजी , द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी , तृतीय केदार तुंगनाथजी , चतुर्थ केदार रुद्रनाथजी और पंचम केदार कल्पेश्वरजी एक साथ विराजमान होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। शीतकाल में पंचगद्दी स्थल ओमकारेश्वर मंदिर उखीमठ में बाबा केदारनाथजी के साथ – साथ द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी (भोगमूर्ति) एक साथ विराजमान रहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहाँ श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध व बाणासुर की पुत्री उषा का विवाह हुआ था। इसीलिए पहले इस जगह का नाम “उषामठ” था जो बाद में “उखीमठ” हो गया।
धारत्तूर परकोटा शैली में निर्मित है अति प्राचीन ओमकारेश्वर मंदिर ।
ओमकारेश्वर मंदिर उखीमठ नगर के मध्य में स्थित है जहाँ ओमकारेश्वर महाराज के साथ -साथ पंच केदारों की भी नियमित पूजा अर्चना की जाती है। मुख्य पुजारी रावल रोज सभी की पूजा अर्चना कर उनको भोग लगाते हैं। ओमकारेश्वर मंदिर एक विशाल मंदिर समूह है जो अतिप्राचीन धारत्तूर परकोटा शैली में निर्मित है। यह मुख्यतः पत्थर व लकड़ी से बना है। एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम के पूर्वज महाप्रतापी राजा मंधाता ने सभी सांसारिक सुखों का त्याग कर भगवान भोलेनाथ की बारह वर्षों तक कठोर तपस्या की जिसके फलस्वरूप भगवान भोलेनाथ ओंकार (ओम की ध्वनि) की ध्वनि के साथ प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसीलिए इस मंदिर का नाम “ओमकारेश्वर” पड़ा।
क्या करें ?
बाबा केदारनाथजी व द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी के साथ -साथ सभी पंच केदारों के दर्शन कीजिए और उनका आशीर्वाद लीजिए मन्दिर परिसर में शांति से बैठकर यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस कीजिए। यहां से नंदा देवी , चौखंबा व केदारनाथ जैसी चोटियों साफ़ दिखाई देती हैं। इसीलिए आस -पास के प्राकृतिक सौंदर्य का मजा लीजिए। पर्वतारोहण , ट्रैकिंग , कैंपिंग का मजा लीजिए। खूब फोटोग्राफी कीजिए । इसके अलावा भी रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , तुंगनाथ मंदिर , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता आदि जहाँ आप जा सकते हैं। आने से पहले अपना Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
ओमकारेश्वर मंदिर उखीमठ आने का सही समय (Best Time To Visit In Omkareshwar Temple Ukhimath)
उखीमठ में बाबा केदारनाथजी और द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी शीतकाल में प्रवास करते हैं। इसीलिए आपको बाबा केदारनाथजी के दर्शन करने के लिए नवंबर से मई के बीच में ही आना पड़ेगा। लेकिन ओमकारेश्वर मंदिर में भगवान ओंकारेश्वर (शिव) सालभर विराजमान रहते हैं। इसीलिए आप उनके दर्शन करने कभी भी आ सकते है। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
ध्यान रखने योग्य बातें।
यह स्थान केदारनाथ धाम , मदमहेश्वरमंदिर , देवरिया ताल , चोपता तुंगनाथ ट्रैक और कालीमठ मंदिर जाने के लिए एक बेस कैंप है। अगर आप यहाँ से कही भी ट्रैकिंग करना चाहते हैं तो पूरी तैयारी के साथ आइये। अगर आप यहां पर्वतारोहण , ट्रैकिंग , कैंपिंग करना चाहते हैं तो इसके बारे में पहले जानकारी अवश्य लें । किसी स्थानीय अनुभवी गाइड से अवश्य सलाह लें। रूद्रप्रयाग में पैदल चलने हेतु अच्छी क्वालिटी का जूता अवश्य पहनें। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
कैसे पहुँचें ओमकारेश्वर मंदिर उखीमठ रूद्रप्रयाग ( How To Reach Omkareshwar Temple Ukhimath)
कितने दिन के लिए आए (Suggested Duration)
ओमकारेश्वर मंदिर उखीमठ में बाबा केदारनाथजी और द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी शीतकाल में प्रवास करते हैं। इसीलिए केदारनाथ बाबा के दर्शन कीजिए । इसके अलावा रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास भी कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे आदि माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , तुंगनाथ मंदिर , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता , खिरसू , सोनप्रयाग , गुप्तकाशी , गौरीकुंड , जहाँ आप जा सकते हैं। इसीलिए यहाँ आप अपने हिसाब से अपना समय बिता सकते हैं। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book कर लीजिए।
