Shri Madhyamaheshwar Temple Pach kedar RudraPrayag Uttarakhand
इस मंदिर में पूरे धार्मिक रीति – रिवाज से की जाती है भगवान भोलेनाथ की नाभि की पूजा -अर्चना।
Shri Madhyamaheshwar Temple Pach kedar RudraPrayag Uttarakhand : उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के एक छोटे से गाँव गौंडार में स्थित है श्रीमध्यमहेश्वर मंदिर । बाबा मध्यमहेश्वरजी को पंच केदारों (केदारनाथ , तुंगनाथ , रुद्रनाथ , मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर) में से द्वितीय केदार माना जाता है। समुंद्रतल से लगभग 3,497 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ के नाभि यानि मध्यभाग की पूजा -अर्चना पूरे धार्मिक रीति – रिवाज से की जाती है। मध्यमहेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ का यह पावन स्वरूप न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है बल्कि शरीर व आत्मा के संतुलन का भी प्रतीक है। उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र होने के कारण सर्दियों में यह पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है। इसीलिए नवंबर माह में दीपावली के बाद मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट विधिवत पूजा -अर्चना के बाद लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं और बाबा मध्यमहेश्वरजी को डोली में बैठाकर एक विशाल धार्मिक उत्सव के साथ बड़े धूमधाम से उखीमठ में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर लाया जाता है जहाँ वो अगले छः माह तक बाबा केदारनाथजी के साथ विराजमान रहते हैं। मध्यमहेश्वर मंदिर एकदम शांत प्रकृति के मध्य विराजमान है।
Similar Places
Shri Kalpeshwar Temple Pach kedar Chamoli Uttarakhand : इस मंदिर में बड़े विधि -विधान से होती है भगवान भोलेनाथ की जटाओं की पूजा -अर्चना।
Shri Rudranath Temple Pach kedar Chamoli Uttarakhand : इस मंदिर में बड़े विधि -विधान से होती है भगवान भोलेनाथ की मुख की पूजा -अर्चना।
Shri Tungnath Temple Pach kedar RudraPrayag Uttarakhand : इस मंदिर में बड़े विधि -विधान से होती है भगवान भोलेनाथ की भुजाओं की पूजा -अर्चना।
Omkareshwar Temple Ukhimath RudraPrayag Uttarakhand : छः महीने का शीतकालीन प्रवास इसी मंदिर में होता है बाबा केदारनाथजी का।
Ukhimath RudraPrayag Uttarakhand : इसी पावन धरा पर है बाबा केदारनाथजी की शीतकालीन गद्दी जहाँ वो छः महीने तक विराजमान रहते हैं।
Gaurikund RudraPrayag Uttarakhand : जहाँ माँ गौरी ने भगवान भोलेनाथ को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
Shri Kedarnath Jyotirlinga Temple RudraPrayag Uttarakhand : इस ज्योतिर्लिंग की पूजा अर्चना से गोत्र हत्या के पाप से मुक्त हुए थे पांडव।
Top 15 Tourist Places To Visit Near RudraPrayag Uttarakhand : रुद्रप्रयाग के आस -पास की इन 15 शानदार जगहों को आपको अवश्य देखना चाहिए।
Koteshwar Mahadev Temple RudraPrayag Uttarakhand : अलकनंदा नदी के किनारे एक पवित्र प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं साक्षात कोटेश्वर महादेव।
कौन हैं पंचकेदार ?
महाभारत युद्ध के बाद गोत्र हत्या (गोत्र यानि अपने ही वंश के लोग) के पाप से मुक्त होने के लिए पांडवों ने भगवान भोलेनाथ की कठोर तपस्या की लेकिन भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन नही दिये क्योंकि वो उनसे काफी नाराज थे। इसीलिए वो बैल का रूप धारण कर हिमालय चले गये। लेकिन हिमालय में विचरण करते वक्त भीम ने उन्हें पहचान लिया। भीम ने उन्हें पकड़ना चाहा लेकिन बैल रूपी शिव तुरंत जमीन में समा गये। बाद में भगवान भोलेनाथ के शरीर के अंग पांच जगहों में प्रकट हुए जिन्हें आज “पंच केदार” कहा जाता है। केदारनाथ धाम जिसे प्रथम केदार माना जाता है। वहाँ बैल का पृष्ठ भाग प्रकट हुआ। इसीलिए वहाँ उनके पृष्ठ भाग (कूबड़) की पूजा की जाती है। तुंगनाथ में बाबाजी की भुजाओं की पूजा की जाती है , रुद्रनाथ में बाबा के मुख की पूजा की जाती है , मध्यमहेश्वर में बाबा की नाभि प्रकट हुई थी और कल्पेश्वर में बाबा की जटाओं की पूजा होती है। यानि गढ़वाल हिमालय में बाबा भोलेनाथ के पांच अंगों की पूजा पांच अलग -अलग रूपों में होती है जिन्हें पंच केदार कहते हैं। ये सभी मंदिर बेहद पवित्र व प्राचीन हैं।
कब बंद होते हैं मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट ।
सर्दियों के शुरू होते ही मध्यमहेश्वर मंदिर में अत्यधिक ठण्ड व बर्फवारी होती है जिस वजह से नवंबर माह में दीपावली के बाद विशेष पूजा -अर्चना कर मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं और फिर गर्मियों में अक्षय तृतीया (अप्रैल -मई) के बाद मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट को पुन: बड़े धूमधाम के साथ खोला जाता है ।
उखीमठ का ओंकारेश्वर मंदिर है बाबा मध्यमहेश्वर जी का शीतकालीन निवास ।
हर साल सर्दियों के शुरू होते ही उखीमठ में बाबा केदारनाथजी के साथ -साथ द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी के आगमन का इंतजार सभी लोगों को रहता है। सर्दियों में (नवंबर माह में) दीपावली के बाद मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद हो जाते हैं और बाबा मध्यमहेश्वर (मध्यमहेश्वर बाबा की उत्सव मूर्ति) को डोली में बैठाकर बड़े धूमधाम से उखीमठ (ओंकारेश्वर मंदिर) लाया जाता है जहाँ वो अगले छः माह तक बाबा केदारनाथजी के साथ विराजमान रहते हैं। उखीमठ को बाबा केदारनाथजी और द्वितीय केदार मध्यमहेश्वरजी की “शीतकालीन गद्दी (Winter Seat)” भी कहा जाता है। ओमकारेश्वर मंदिर में सालभर भगवान ओंकारेश्वर (शिव) की नित्य पूजा – अर्चना की जाती है।
अद्भुत व अति प्राचीन है मध्यमहेश्वर मंदिर ।
मध्यमहेश्वर मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर मुख्यतः पत्थर व लकड़ी से बना है। समुंद्रतल से लगभग 3,497 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर चारों तरफ से हरी -भरी पहाड़ियों से धिरा है जो दिल को बड़ा सुकून देती हैं। रूद्रप्रयाग से लगभग 70 किलोमीटर दूर उखीमठ के पास स्थित रांसी गाँव से लगभग 16 किलोमीटर पैदल चलकर मध्यमहेश्वर मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। रांसी गाँव ही मध्यमहेश्वर मंदिर का बेस कैंप है जहाँ से 16 किलोमीटर की ट्रैकिंग शुरू होती है। मध्यमहेश्वर मंदिर ट्रेक केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य का हिस्सा है। इसीलिए यहाँ ट्रैकिंग करने वक्त आपको कस्तूरी मृग , दुर्लभ व मनमोहक रंग -बिरंगे पक्षी व अन्य दुर्लभ जीव -जंतु दिखाई देंगे।
क्या करें ?
बाबा मध्यमहेश्वरजी के दर्शन कीजिए और उनका आशीर्वाद लीजिए। यह मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। इसीलिए मन्दिर परिसर में शांति से बैठकर यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस कीजिए। यहां से चौखम्बा पर्वत शृंखला साफ दिखाई देती है। चौखम्बा पर्वत में सूर्योदय का भव्य नजारा देखने लायक होता है। सुंदर बुग्यालों , बुरांश के फूलों , पर्वतारोहण , ट्रैकिंग और कैंपिंग का मजा लीजिए। खूब फोटोग्राफी कीजिए । इसके अलावा भी रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता आदि जहाँ आप जा सकते हैं। यहाँ आने से पहले अपना Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
मध्यमहेश्वर मंदिर आने का सही समय (Best Time To Visit In Shri Madhyamaheshwar Temple)
सर्दियों के शुरू होते ही मध्यमहेश्वर मंदिर में ठण्ड व बर्फवारी होती है जिस वजह से नवंबर माह में दीपावली के बाद विशेष पूजा -अर्चना कर मंदिर के कपाट लगभग छः महीने के लिए बंद कर दिये जाते हैं। इसीलिए आपको बाबा मध्यमहेश्वर जी के दर्शन मध्यमहेश्वर मंदिर में ही करने के लिए गर्मियों (अप्रेल से नवंबर के बीच) में आना पड़ेगा। लेकिन जाड़ों में आप बाबा मध्यमहेश्वरजी के दर्शन उखीमठ (ओंकारेश्वर मंदिर) में कर सकते हैं। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
ध्यान रखने योग्य बातें।
मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट सर्दियों में बंद हो जाते हैं। इसीलिए मंदिर आने से पहले मंदिर के कपाट खुलने व बंद होने की पूरी जानकारी अवश्य ले लीजिए। ट्रैकिंग करते वक्त वन्य जीवों से सावधान रहें। अगर आप यहाँ ट्रैकिंग करना चाहते हैं तो पूरी तैयारी के साथ आइये। अगर आप यहां पर्वतारोहण , ट्रैकिंग या कैंपिंग करना चाहते हैं तो भी इसके बारे में पहले जानकारी अवश्य लें । किसी स्थानीय अनुभवी गाइड से अवश्य सलाह लें। मध्यमहेश्वर मंदिर तक पैदल चलने हेतु अच्छी क्वालिटी का जूता अवश्य पहनें। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
