Koteshwar Mahadev Temple RudraPrayag Uttarakhand
अलकनंदा नदी के किनारे एक पवित्र प्राकृतिक गुफा में साक्षात विराजमान हैं कोटेश्वर महादेव।
Koteshwar Mahadev Temple RudraPrayag Uttarakhand : उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के रूद्रप्रयाग शहर से लगभग 3 किलोमीटर दूर अलकनंदा नदी के किनारे एक पवित्र गुफा के अंदर विराजमान हैं बाबा कोटेश्वर महादेव। कोटेश्वर का अर्थ है “एक करोड़ देवताओं के स्वामी”। प्राकृतिक रूप से बनी इस गुफा के अंदर अनेक प्राकृतिक आकृतियों बनी हैं । गुफा के अंदर और बाहर लगातार पानी की धाराएँ गिरती रहती है। ऐसा लगता है मानो कभी शांत तो कभी रौद्र रूप में बहती अलकनंदा नदी भी भगवान भोलेनाथ के चरण स्पर्श करने को सदैव लालायित रहती है। गुफा के बाहर एक भव्य मंदिर परिसर भी बना है। मंदिर परिसर से अलकनंदा नदी का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। मंदिर परिसर का एकदम शांत , सुरम्य आध्यात्मिक वातावरण व दिन भर मंदिर में गूँजती घंटियों की मधुर ध्वनि सहज ही भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। शिवरात्रि के दिन व सावन के महीने में यहाँ श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं।
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यह नगरी बाबा कोटेश्वर महादेव (शिव) की है।
अलकनंदा नदी के किनारे प्राकृतिक रूप से बनी इस गुफा के अंदर शिवलिंग के अलावा अनेक प्राकृतिक आकृतियों बनी हैं। गुफा के अंदर और बाहर लगातार जल धाराएँ गिरती रहती है। मंदिर परिसर से अलकनंदा नदी का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है और यही अलकनंदा नदी यहाँ से आगे चलकर देवप्रयाग में भागीरथी नदी से मिल जाती है जिसके बाद इसे गंगा (नदी) नाम से जाना जाता है। मंदिर परिसर में माँ जगदम्बा , बजरंगबली और गणेश जी भी विराजमान हैं। वैसे तो यहाँ वर्षभर श्रद्धालु आते रहते हैं मगर शिवरात्रि व सावन के महीने में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है।
क्या करें ?
मंदिर परिसर में शांति से बैठकर कल -कल बहती अलकनंदा नदी को देखिये। गुफा के अंदर कोटेश्वर महादेव के दर्शन कीजिए। रूद्रप्रयाग शहर व उसके आस -पास के प्राकृतिक सौंदर्य का मजा लीजिए। पर्वतारोहण , ट्रैकिंग , कैंपिंग , राफ़्टिंग व पैराग्लाइडिंग का मजा लीजिए। खूब फोटोग्राफी कीजिए । इसके अलावा भी रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , तुंगनाथ मंदिर , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता आदि जहाँ आप जा सकते हैं। आने से पहले अपना Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
कोटेश्वर महादेव मंदिर आने का सही समय (Best Time To Visit In Koteshwar Mahadev Temple)
चूंकि रूद्रप्रयाग एक पहाड़ी क्षेत्र है जहाँ वर्षा ऋतु के अलावा किसी भी समय आया जा सकता है। वैसे रूद्रप्रयाग आने का सही समय मार्च से लेकर जून तक और अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक है। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
ध्यान में रखने योग्य बातें।
अगर आप यहां पर्वतारोहण , ट्रैकिंग , कैंपिंग , राफ़्टिंग व पैराग्लाइडिंग करना चाहते हैं तो इसके बारे में पहले जानकारी अवश्य लें । किसी स्थानीय अनुभवी गाइड से अवश्य सलाह लें। रूद्रप्रयाग में पैदल चलने हेतु अच्छी क्वालिटी का जूता अवश्य पहनें। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
कैसे पहुँचें कोटेश्वर महादेव मंदिर रूद्रप्रयाग ( How To Reach Koteshwar Mahadev Temple)
कितने दिन के लिए आए (Suggested Duration)
शांत , सुन्दर , सुरम्य व अद्भुत प्राचीन गुफा में विराजमान कोटेश्वर बाबा के दर्शन कीजिए । इसके अलावा रूद्रप्रयाग शहर के आस -पास भी कई धूमने लायक सुंदर जगहें है जैसे आदि माँ धारीदेवी मंदिर , केदारनाथ , आदि-बद्री , बासुकीताल , तुंगनाथ मंदिर , अगस्तमुनि मंदिर , खूबसूरत चोपता , खिरसू , सोनप्रयाग , गुप्तकाशी , गौरीकुंड , जहाँ आप जा सकते हैं। इसीलिए यहाँ आप अपने हिसाब से अपना समय बिता सकते हैं। अगर आप रूद्रप्रयाग में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book कर लीजिए।
