आस्था व विश्वास का अद्भुत संगम हैं कैची धाम।
Neem Karoli Baba Ashram Kainchi Dham In Nainital Uttarakhand
Neem Karoli Baba Ashram Kainchi Dham In Nainital Uttarakhand : उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में नैनीताल जिले के अल्मोड़ा – भवाली – रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग में स्थित “नीम करौली बाबा आश्रम यानि कैंचीधाम” लाखों लोगों की आस्था व विश्वास का केंद्र है। यह पवित्र धाम बीसवीं शताब्दी में जन्मे दिव्य पुरुष बाबा नीम करौलीजी महाराज की पावन तपोभूमि है। यह आश्रम शिप्रा नदी के किनारे तथा ऊँचें -ऊँचें देवदार के पेड़ों व धने जंगलों के बीच स्थित हैं। बड़ा ही मनमोहक व मन को असीम शांति प्रदान करने वाला यह आध्यात्मिक धाम फेसबुक (Facebook) के संस्थापक मार्क ज़ुकेरबर्ग तथा एप्पल (Apple) के संस्थापक स्टीव जॉब्स की प्रेरणा व आस्था का केंद्र भी रहा है। मंदिर के पास बहती शिप्रा नदी तथा आस -पास का प्राकृतिक सौंदर्य इस धाम की खूबसूरती को और बढ़ा देता है। इस जगह का नाम “कैंची” शायद इस जगह से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग में एक तीव्र कैंची के आकारनुमा मोड़ की वजह से पड़ा हैं। प्रदूषण मुक्त शुद्ध हवा , ठंडा पानी , मनमोह लेने वाला प्राकृतिक सौंदर्य , सुरम्य व शांत वातावरण , शहरी भीड़ -भाड़ से दूर दिल को असीम शांति प्रदान करने वाले इस धाम में हर साल पर्यटकों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।
कौन थे बाबा नीम करोली ( Neem Karoli Baba Nainital )
आगरा के निकट फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर में मार्गशीष माह की अष्टमी तिथि को जन्मे बाबा नीम करौलीजी का असली नाम लक्ष्मणदास शर्मा था। फर्रुखाबाद जिले के नीब करौली गांव में इनको प्रथम बार साधु रूप में साधना और तपस्या करते हुए देखा गया। तब से ही लोग इनको “नीब करौली” या “नीम करौली” कह कर बुलाने लगे। कैंची धाम निवासी पूर्णानंद तिवारीजी के अनुसार , सन 1942 में एक रात जब वो अपने घर लौट रहे थे तभी खुफिया डांठ नामक एक निर्जन स्थान पर उन्हें एक विशालकाय व्यक्ति कंबल ओढ़े दिखा। पहले तो वो उस व्यक्ति को देखकर डर गए। लेकिन बाद में जब उस व्यक्ति ने उन्हें अपने पास बुलाया और उनसे बात की तब जाकर उनका डर दूर हुआ। थोड़ी देर बात करने के बाद वो तिवारीजी को 20 साल बाद वापस लौटने का वादा देकर वहाँ से चले गए। यह व्यक्ति बाबा नीम करौली महाराज ही थे। अपने किये वादे के अनुसार ठीक 20 साल बाद 24 मई 1962 में रानीखेत से नैनीताल लौटते वक्त बाबाजी अचानक कैंची में आकर रुक गए और सड़क किनारे बने एक पैराफिट में जाकर बैठ गए और फिर सदा के लिए वही के होकर रह गये।
कैंची धाम मंदिर की स्थापना।
सन 1962 के बाद बाबाजी कैंची में ही निवास करने लगे। 15 जून 1964 को पहली बार उन्होंने यहां हनुमान जी की मूर्ति को विधिवत स्थापित किया । इसीलिए हर साल 15 जून को “प्रतिष्ठा दिवस या स्थापना दिवस” के रुप में मनाया जाता है। इस दिन यहां विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है जिसमें देश-विदेश के लाखों भक्त आकर प्रसाद ग्रहण करते हैं तथा बाबा जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कई लोग यहां पर अपनी सेवाएं भी प्रदान करते हैं। यहाँ पर लोग खुलकर दान-पुण्य भी करते हैं । साल-दर-साल यहाँ भक्तों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। लोग असीम शांति की खोज तथा अपनी मनोकामना दिल में लिए बाबाजी के दर्शन करने आते हैं। बाबाजी भी किसी को खाली हाथ वापस नहीं भेजते हैं। कई लोगों का कहना तो यह भी है कि उन्हें बाबाजी के साक्षात दर्शन हुए हैं।
बाबा मार्क ज़ुकेरबर्ग , स्टीव जॉब्स तथा जूलिया रॉबर्ट्स के लिए भी रहे प्रेरणा स्रोत।
दुनिया की बड़ी हस्तियां में शुमार मार्क ज़ुकेरबर्ग , स्टीव जॉब्स , जूलिया रॉबर्ट्स आदि के भी बाबाजी प्रेरणास्रोत रहे हैं । उनका कहना है कि उन्होंने यहां आकर बाबाजी के दर्शन कर अपने जीवन के सर्वोच्च मुकाम को हासिल किया। आज भारत की कई बड़ी हस्तियाँ भी बाबा नीम करौलीजी की भक्त हैं। बाबाजी का यह आध्यात्मिक धाम भारत में ही नहीं बल्कि पश्चिमी देशों में भी भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म की महिमा का प्रतिनिधित्व करता है। बाबाजी एक सिद्ध पुरुष थे जिन्होंने अपने जीवनकाल में कई सारे चमत्कार दिखाइए। आज भी लोगों को उनके चमत्कारों का एहसास होता रहता है । कहते हैं कि एक बार मंदिर में भंडारा बनाने वक्त धी खत्म हो गया था। यह जानकारी जब बाबाजी को मिली तो उन्होंने भक्तों को शिप्रा नदी से एक कनस्तर (टिन) पानी लाने का आदेश दिया। आदेशानुसार भक्त शिप्रा नदी से एक कनस्तर पानी भरकर ले आए और जैसे ही भक्तों ने कनस्तर का पानी कढ़ाई में उड़ेला तो वह धी के रूप में परिवर्तित हो गया। इसके बाद इसी घी से प्रसाद बनाकर भक्तों में बांटा गया। ऐसे ही अनेक चमत्कार करते-करते , लोगों का दुख – दर्द दूर करते-करते बाबाजी 11 सितंबर 1973 को यह संसार छोड़ कर उस परमात्मा में विलीन हो गए।
बाबा नीम करौली बजरंगबली (हनुमान जी) के अवतार थे।
बाबा नीम करौली को कई लोग बजरंगबली का (हनुमान जी) अवतार भी मानते हैं । स्वयं बाबा नीम करौली बजरंगबली के बहुत बड़े भक्त थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में हनुमानजी के कई मंदिरों की स्थापना की जिनमें नैनीताल से कुछ दूरी में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर भी शामिल है। ऐसा कहा जाता है कि बाबाजी हनुमानगढ़ी मंदिर में प्रतिदिन पैदल जाकर बजरंगबली के दर्शन करते थे। कैंची धाम में भी बजरंगबली के मंदिर के अलावा राम सीता , मां देवी दुर्गा सहित अनेक देवी देवताओं के मंदिर स्थापित हैं। साथ ही साथ यहां एक बड़ा हवन कुंड भी है। स्वयं बाबा नीम करौलीजी महाराज की मूर्ति को भी यहां पर स्थापित किया गया है। यह मूर्ति इतनी जीवंत है कि इसे देखकर ऐसा लगता है मानो जैसे अभी बाबा नीम करौली महाराज बोल उठेंगे। बाबाजी वैसे तो महान दिव्यात्मा थे लेकिन हमेशा कंबल ओढ़े बाबाजी का रूप ऐसा दिखाता था जैसे कि वो कोई दिव्यात्मा ना होकर अपने परिवार के ही कोई बुजुर्ग सदस्य हो। बस बाबाजी का यहीं रूप दिल के कहीं अंदर तक छू जाता है। कैंची धाम को सोमवारी बाबा का भी साधना स्थल माना जाता है । ऐसा कहा जाता है कि यहां पर सोमवारी बाबाजी ने भी साधना की थी ।
स्थापना दिवस (15 जून) धूमधाम से मनाया जाता है ।
कैंची धाम मंदिर में प्रतिवर्ष 15 जून को स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिर की तरफ से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है जिसमें लाखों भक्त आकर भंडारे का आनंद लेते हैं और साथ ही साथ बाबाजी का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। इस अवसर पर इस मंदिर में एक विशेष पकवान बनाया जाता है जिसे “रोट” कहा जाता हैं। रोट बनाने के लिए आटे को गुड़ युक्त पानी से गूदकर रोटी के आकार में बेला जाता है फिर उसको घी में तलकर प्रसाद रूप में बांटा जाता है। यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है। यहां पर प्रसाद के रूप में मुख्य रूप से इसी पकवान का वितरण किया जाता है। लोग इस प्रसाद को लेने के लिए इस दिन अवश्य कैंची धाम पहुंचते हैं। वैसे तो यह स्थान आस्था , विश्वास व मनोकामनाओं की पूर्ति का स्थान है लेकिन धीरे-धीरे यह एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में भी बदलता जा रहा है । यहां पर हर साल कई पर्यटक शांति की तलाश में आते हैं और कई दिन बाबाजी के चरणों में बिताते हैं ।
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कैंची धाम घूमने का सही समय (Best Time To Visit Kainchi Dham )
कैंची धाम में आने का सही समय मार्च से लेकर जून तक और अक्टूबर से लेकर फरवरी तक है। कैंची धाम में आप अपना नया साल मनाइए । अक्टूबर में दिवाली , दशहरे के आसपास और गर्मियों की छुट्टियों के वक्त कैंची धाम का मौसम बहुत सुहाना रहता है । वैसे बाबाजी के दर्शन करने आप कैंची धाम कभी भी आ सकते हैं।
कहाँ ठहरें ( Where To Stay In Kainchi Dham)
कैंची धाम में पर्यटकों के ठहरने के लिए एक आश्रम की व्यवस्था है जहाँ पर्यटक आराम से रह सकते हैं। मगर आश्रम में ठहरने के लिए व्यवस्थापकों की अनुमति लेनी अनिवार्य है। इसके अलावा उसके आसपास कुछ होटल व रिजॉर्ट्स भी बने है जिनमें पर्यटक रहते हैं। लेकिन सीजन टाइम पर ये होटल और रिसॉर्ट बुक हो जाते हैं। इसीलिए अगर आपको कैची धाम के आस-पास के होटलों में ही ठहरना है तो आपको यहां आने से पहले ही किसी होटल में बुकिंग करनी पड़ेगी। आप भवाली में भी रात्रि विश्राम कर सकते हैं जो यहां से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा कैंची धाम से कुछ ही दूरी में नैनीताल , भुजियाघाट व भीमताल में भी आपको होटल आराम से मिल सकते हैं। अगर आप कैंचीधाम में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book कर लीजिए।
कैंची धाम कितने दिन के लिए आए (Suggested Duration)
कैंची धाम में आप बाबाजी के चरणों में शांति व सुकून से बैठ कर अपना समय अपने हिसाब से बिता सकते हैं। अगर आप भीमताल में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book कर लीजिए।
कैंची धाम क्यों आए (Why One Should Visit To Nainital)
मौसम (Nainital Weather)
कैंची धाम में गर्मियों में बहुत ज्यादा तापमान नहीं रहता है। मई और जून में भी यहाँ का तापमान 25 से 30 डिग्री के बीच में ही रहता है। लेकिन जाड़ों में यह गिर कर 10 से 15 डिग्री के आस पास हो जाता है। अगर आप भवाली में एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book कर लीजिए।
