Bhimtal Lake In Bhimtal Nainital Uttarakhand
भीमताल झील के बीचो – बीच स्थित टापू में है एक शानदार एक्वेरियम।

Bhimtal Lake In Bhimtal Nainital Uttarakhand : उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले के भीमताल शहर में स्थित है नैनीताल जिले की सबसे बड़ी झील जिसे भीमताल झील के नाम से जाना है। भीमताल झील की लंबाई लगभग 1670 मीटर चौड़ाई 427 मीटर और गहराई लगभग 30 मीटर है। समुद्रतल से लगभग 1335 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह त्रिभुजाकार झील नैनीताल जिले की सबसे बड़ी झील मानी जाती है। चारों तरफ से हरे-भरे पहाड़ों से घिरी यह एक शांत झील है। झील का पानी एकदम साफ है जो नौकायन और मछली पकड़ने के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। झील में नौका विहार करते पर्यटक और झील में तैरती बतखें सबका मनमोह लेती हैं। दिनभर ये सुंदर सफेद बतखें पंक्तिबद्ध होकर पर्यटकों के दिए हुए दानों को चुगती रहती हैं और मधुर ध्वनि में कलरव करती हुए झील में मस्त होकर यहाँ – वहाँ धूमती रहती हैं। खूबसूरत झील , झील के बीचो -बीच एक टापू , झील के चारों तरफ हरी – भरी सुंदर वादियां और सामने खड़ा गर्ग पर्वत भीमताल के मुख्य आकर्षण हैं।
भीमताल झील के बीचो – बीच स्थित टापू में हैं एक शानदार एक्वेरियम।
झील के बीचो-बीच ज्वालामुखी की चट्टानों से निर्मित एक अत्यंत सुंदर टापू है। । झील के किनारे से द्वीप की दूरी 91 मीटर है। टापू में हरे -भरे पेड़ों के बीच मत्स्य पालन विभाग की तरफ से एक मछलीघर यानी (Fish Aquarium) बनाया गया है जिसमें लगभग 71 देशों की मछलियां रखी गई हैं। शीतल जल से लेकर समुद्री जल में मिलने वाली रंग – बिरंगी और अलग-अलग प्रजाति की यह मछलियां एक्वेरियम की शोभा बढ़ाती हैं । लगभग 33 टैंकों में से सिर्फ 2 टैंकों में ही समुद्री जल में रहने वाली मछलियों को रखा गया है। एक्वेरियम को बहुत साफ सुथरा रखा जाता है और सुंदर-सुंदर रोशनी लगाकर इन को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह एक विश्वस्तरीय एक्वेरियम तो है ही साथ में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र व बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक भी है। इस टापू में नौका से जाने का बहुत अच्छा प्रबंध है। सच में यहां से भीमताल एक अलग ही रूप में नजर आता है। पर्यटक यहां पर अपने जीवन के यादगार क्षणों को जीते हैं ।
महाभारत काल से जुड़ा हैं भीमताल झील का नाता
हिंदू धर्म के पौराणिक महाकाव्य महाभारत के अनुसार हस्तिनापुर राज्य में धृतराष्ट्र व पांडु नाम के दो भाई थे जिसमें महाराज पांडु के पाँँच पुत्र थे। उन्ही पाँच पुत्रों में से तीसरे पुत्र का नाम भीम था। भीम अत्यधिक बलशाली थे। कहा जाता है कि अपने अज्ञातवास का दौरान वो पाँचों भाई यहां आये थे। तब भीम ने अपने बल व बुद्धि का प्रयोग कर इस जगह पर भूमि को खोदकर एक विशाल झील का निर्माण किया जिसे आज लोग भीमताल झील (यानी कि भीम के आकार की ताल) के नाम से जानते हैं।
क्या करें ?
नौका विहार कीजिए। खूबसूरत प्राकृतिक नजारों का दीदार कीजिए। प्रकृति का आनंद लीजिए और टापू में जाकर एक्वेरियम अवश्य देखिये। सीजन टाइम में यहाँ काफी भीड़ -भाड़ रहती है। इसीलिए अगर आप यहाँ एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
ध्यान रखने योग्य बातें।
आप यहां मार्च से लेकर जून तक और सितंबर से लेकर दिसंबर तक कभी भी आ सकते हैं। वर्षा होने पर यहाँ हल्की ठंड रहती है। इसीलिए गर्म कपड़े साथ में लाना न भूलें। अगर आप यहाँ एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book कर लीजिए। फोटोग्राफी के लिए एक अच्छा सा कैमरा अपने साथ अवश्य रखें। ट्रैकिंग के शौक़ीन अपने साथ एक अच्छी क्वालिटी का जूता या स्पोर्ट शू अवश्य रखें।
कैसे पहुँचें भीमताल ( How to Reach In Bhimtal)
अवधि।
झील के खूबसूरत नजारों को देखते हुए अपना सुकून भरा कीमती समय आप अपने हिसाब से बिता सकते हैं । अगर आप यहाँ एक – दो दिन रुकना चाहते हैं तो आने से पहले कोई Hotel Book अवश्य कर लीजिए।
